उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने शुक्रवार को विधानसभा को बताया कि यूपी राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपीएसआरटीसी) वर्तमान में 12,325 बसों का संचालन कर रहा है और राज्य सरकार ने वंचित गांवों में कनेक्टिविटी सुधारने के लिए 1,540 नए मार्गों की पहचान की है. 

यूपी के परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) सिंह बजट सत्र के दौरान सपा विधायक अखिलेश के एक सवाल का जवाब दे रहे थे. उन्होंने कहा कि 9,373 बसें यूपीएसआरटीसी के स्वामित्व में हैं, जबकि 2,952 निजी तौर पर अनुबंधित हैं. ये बसें ग्रामीण क्षेत्रों को ब्लॉक, तहसील और जिलों से जोड़ती हैं, जिससे सार्वजनिक परिवहन पहुंच में सुधार होता है. उन्होंने कहा कि नए मार्गों से 28,000 गांवों को फायदा होगा. 

सपा विधायक पंकज मलिक के सवाल के जवाब में दयाशंकर सिंह ने कहा कि सरकार की योजना जीर्ण-शीर्ण बसों को नई बसों से बदलने की है. अनुपयुक्त और नीलामी के मानदंडों को पूरा करने वाली बसों को बेड़े से हटा दिया जाता है. उन्होंने बताया कि पूंजी निवेश के तहत 2023-24 और 2024-25 के बीच 6,138 बसें खरीदी गई हैं. 

न्यूज एजेंसी के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में पुरानी बसों के बारे में सिंह ने स्पष्ट किया कि वहां 10 साल से अधिक पुरानी या 11 लाख किलोमीटर से अधिक चली कोई भी बस नहीं चल रही है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि 6,138 नई बसों की खरीद विभाग के इतिहास में सबसे बड़ी है, जिसमें कुंभ मेले के लिए 3,000 बसें आवंटित की गई हैं. 

आमतौर पर बसों को 10 साल या 11 लाख किलोमीटर चलने के बाद बदल दिया जाता है, लेकिन मरम्मत के बाद कुछ बसें 15 साल तक चलती हैं. दयाशंकर सिंह ने यह भी घोषणा की कि जल्द ही ग्रामीण क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक बसें शुरू की जाएंगी और अटल इलेक्ट्रिक सिटी बसें दो शहरों को जोड़ेगी. 

विधायक विनोद चतुर्वेदी के जवाब में मंत्री ने खुलासा किया कि ड्राइवरों और कंडक्टरों की कमी के कारण जनवरी 2025 में 700 बसें बंद रहीं, जिससे 8,08,000 रुपये की आय का नुकसान हुआ. 

पुरानी बसों के बारे में सिंह ने सपा विधायक पल्लवी पटेल को बताया कि बेड़े में 219 बसें 12 साल से अधिक पुरानी हैं, जबकि 2,315 बसें 12 लाख किलोमीटर से अधिक चल चुकी हैं. 

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